आपको मैं कैसे खुश करूं मेरे भगवान जी?

आदरणीय ईश्वर/ अल्लाह/ गॉड/ आदि जी, नमस्ते!
एक तो आपने मुझे इस घटिया, वहशी, निर्मम और मानवता रहित दुनिया में बिना मुझसे पूछे भेज कर न जाने किस जन्म का बदला चुकाया है। ऊपर से पता नहीं आपको क्या समस्या है कि आप मेरे परेशान होने, कष्ट झेलने और यातना भुगतने से ही खुश होते हो? क्या मेरी शांति और खुशी आपको नहीं सुहाती? एक तो वैसे ही आपकी बनाई दुनिया में एक पल का चैन नहीं है, ऊपर से आपका भी न जाने क्या शौक है कि जब तक आपके लिए मुसीबत न उठाओ, आपको तसल्ली ही नहीं होती। आपका 'ऑफर' भी अजीबोगरीब है कि मैं इस दुनिया में आपके लिए कष्ट उठाऊं, ताकि आपकी बनाई किसी काल्पनिक दुनिया में जाकर एक-से-एक मजे पा सकूं!!
आखिर आपको इस बात से प्रसन्नता क्यों होती है कि मैं आपके नाम पर कष्ट झेलूं? आपके लिए व्रत रख कर भूखा रहूं तो आप फूले नहीं समाते हो। परिक्रमा करने और कांवड़ से गंगाजल चढ़ाने के लिए अपने पैरों को लहू-लुहान कर लूं, तभी आप प्रसन्न होकर कृपा बरसाएंगे। अगर चलने की बजाय मैं जमीन पर लोट लगा कर परिक्रमा करूं तो आप गदगद हो जाएंगे और अपनी वी.आई.पी. कृपा अरसाएंगे। मैं आपके रथ का हुक अपनी पीठ की खाल में गड़ा लूं तो आपकी खुशी का पारावार नहीं रहता। लोहे की सलाई आपके नाम पर अपने गाल के आर-पार कर लूं तो आप मेरे पुण्य के खाते में मार्क्स बढ़ा दोगे। अपनी पीठ पर ब्लेड लगी चेनों से वार करूं या अपनी छाती घूंसे मार-मार कर लाल कर लूं तो आप रहमत बरसाते हो। और अगर अपने हाथों में कील ठोक कर सूली पर चढ़ जाऊं और कांटों का ताज पहन लूं तो आप सीधा स्वर्ग का टिकट दोगे।
मैं सेक्स न करूं, अंदर-ही-अंदर कुंठाओं से सुलगता रहूं तो भी आप खुश होंगे और मेरे लिए परमानंद के द्वार खोल देंगे। क्या आपको नपुंसक अथवा यौन भावनाओं का दमन करने वाले लोग ही पसंद हैं? और आप उनको ही धरती पर अपना ठेका देते हो? सुना आपने ही मुझे बनाया है, तो क्या जब आप मेरे अंदर यौनेच्छाएं भर रहे थे, तो उस समय आपको झपकी लग गयी थी? मैं नंगा हो जाऊं, अपने बाल बढ़ा लूं, सिर्फ एक टाइम खाना खाऊं, पैदल चलूं और जमीन पर सोऊं तो आपका पहुंचा हुआ भक्त समझा जाउं। और ठीक से कपड़े न पहनूं, गर्मी-सर्दी झेलूं और अजीब-अजीब तरह की हरकतें करूं, तब परम हंस। मैं खुद चैन से रहूं, दूसरों को भी चैन से रहने दूं, आराम से खाऊं-पीऊं, अपने शरीर को कष्ट नहीं दूं और बिना किसी को धोखा दिए आराम की जिंदगी गुजारूं, तो आपकी नजरों से क्यों गिर जाता हूं, यह रहस्य आज तक मेरी समझ में नहीं आया। और तब आप अपनी कृपा से मुझे वंचित क्यों कर देते हो? अब या तो आप सैडिस्ट हो या फिर आपके सारे भक्त मैसोकिस्ट हैं।

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